बुन्देलखण्ड की बुढ़की ( मकर संक्रांति)
बुंदेलखंड में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहाँ इस त्योहार को स्थानीय भाषा में 'सकराँत' या 'सकरात' कहा जाता है, और कुछ क्षेत्रों में इसे ' बुढ़की' के नाम से भी जाना जाता है(छतरपुर, दमोह, महोबा, हमीरपुर जैसे जिलों में)। खास तौर से जहाँ से मैं आती हूँ। बुंदेलखंड की संस्कृति में इसका महत्व धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल का भी है। ⭐ बुन्देलखण्ड की मकर संक्रांति को हम इस तरह से भी समझ सकते है : 1. पवित्र स्नान (Sankranti Snan) या बुढ़की जी, बुढ़की का सीधा सीधा अर्थ डुबकी से ही होता है, अर्थात् पवित्र स्नान। बुंदेलखंड में पवित्र नदियों में स्नान करने की गहरी परंपरा है। श्रद्धालु सुबह तड़के उठकर बेतवा, केन, धसान और मंदाकिनी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। ओरछा में बेतवा नदी और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है। और जो यहाँ नहीं जा पाते है वो घर पर ही संक्रांति मनाते है। और जो घर पर संक्रांति मनाते है वो संक्रांति के दिन तिल के साथ स्नान करते है, तिल को ...