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बुन्देलखण्ड की बुढ़की ( मकर संक्रांति)

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बुंदेलखंड में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहाँ इस त्योहार को स्थानीय भाषा में 'सकराँत' या 'सकरात' कहा जाता है, और कुछ क्षेत्रों में इसे ' बुढ़की' के नाम से भी जाना जाता है(छतरपुर, दमोह, महोबा, हमीरपुर जैसे जिलों में)। खास तौर से जहाँ से मैं आती हूँ। बुंदेलखंड की संस्कृति में इसका महत्व धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल का भी है। ⭐ बुन्देलखण्ड की मकर संक्रांति को हम इस तरह से भी समझ सकते है :  1. पवित्र स्नान (Sankranti Snan) या बुढ़की    जी, बुढ़की का सीधा सीधा अर्थ डुबकी से ही होता है, अर्थात् पवित्र स्नान। बुंदेलखंड में पवित्र नदियों में स्नान करने की गहरी परंपरा है। श्रद्धालु सुबह तड़के उठकर बेतवा, केन, धसान और मंदाकिनी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। ओरछा में बेतवा नदी और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है। और जो यहाँ नहीं जा पाते है वो घर पर ही संक्रांति मनाते है। और जो घर पर संक्रांति मनाते है वो संक्रांति के दिन तिल के साथ स्नान करते है, तिल को ...

बुंदेलखंड का दशहरा

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आप सभी को दशहरा की राम राम पहुंचे जूं 🙏     दशहरा, धर्म का अधर्म पर, सत्य का असत्य पर जीत का प्रतीक दशहरा। सभी जानते है कि आज के दिन ही भगवान श्री राम ने, लंका नरेश रावण का वध किया था पर उन्होंने एक अहंकारी, अधर्मी, अत्याचारी रावण का रावण का वध किया था, इसलिए तो कहते है कि धर्म की, सत्य की जीत का पर्व है ये। उन्होंने महाज्ञानी रावण का वध नहीं किया था, क्योंकि अगर किया होता तो वो लक्ष्मण जी को कभी रावण के पास ज्ञान लेने के लिए नहीं कहते। आज हम रावण इसलिए नहीं जलाते की वो रावण था, हम उसको अधर्म, अत्याचार का प्रतीक मानकर इसलिए जलाते है कि अगर हमारे अंदर भी ऐसा कुछ है तो वो आज इसके साथ ही त्याग दिया जाए और जलकर राख हो जाए।        सभी जगह दशहरा को मनाने कि अपनी अलग मान्यताएं है। बुंदेलखंड में इसे मनाने की अपनी अलग ही मान्यताएं और अलग ही उल्लास होता है। यहां सिर्फ रावण का दहन करके ही इस पर्व को नहीं मनाया जाता, इसे बड़े प्रेम से मनाया जाता है। तो चलिए देखते है कि आखिर कैसे यहां दशहरा का पर्व मनाया जाता है।       दशहरा को बुंदेलखंड मे म...