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बुन्देलखण्ड की बुढ़की ( मकर संक्रांति)

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बुंदेलखंड में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहाँ इस त्योहार को स्थानीय भाषा में 'सकराँत' या 'सकरात' कहा जाता है, और कुछ क्षेत्रों में इसे ' बुढ़की' के नाम से भी जाना जाता है(छतरपुर, दमोह, महोबा, हमीरपुर जैसे जिलों में)। खास तौर से जहाँ से मैं आती हूँ। बुंदेलखंड की संस्कृति में इसका महत्व धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल का भी है। ⭐ बुन्देलखण्ड की मकर संक्रांति को हम इस तरह से भी समझ सकते है :  1. पवित्र स्नान (Sankranti Snan) या बुढ़की    जी, बुढ़की का सीधा सीधा अर्थ डुबकी से ही होता है, अर्थात् पवित्र स्नान। बुंदेलखंड में पवित्र नदियों में स्नान करने की गहरी परंपरा है। श्रद्धालु सुबह तड़के उठकर बेतवा, केन, धसान और मंदाकिनी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। ओरछा में बेतवा नदी और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है। और जो यहाँ नहीं जा पाते है वो घर पर ही संक्रांति मनाते है। और जो घर पर संक्रांति मनाते है वो संक्रांति के दिन तिल के साथ स्नान करते है, तिल को ...

The Ancient Blueprint for a Perfect Society

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Photo by  Europeana  on  Unsplash “W hat if our leaders were philosophers, our soldiers selfless protectors, and our workers content in their roles? Over two thousand years ago, Plato imagined such a society — a blueprint for perfection.” 👨‍🏫  PLATO Plato (427–347 BCE) was a Greek philosopher, student of Socrates , and teacher of Aristotle . He founded the  Academy in Athens , one of the earliest institutions of higher learning in the Western world . His writings, especially  The Republic , explore themes of justice , politics , education , and the nature of reality. Plato believed that true knowledge comes from reason and philosophy, not just sensory experience, and he introduced the famous  Theory of Forms , which argues that beyond the physical world lies a realm of perfect, eternal ideas. ✨  Plato’s Vision of the Ideal Rajya 🧠  Philosopher King : The ruler must be wise, rational, and guided by philosophy. Plato believed only philosophe...

मेरा कस्बा

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नमस्कार,     मैं आज आपको अपने घर, अपने कस्बे के बारे में बताने वाली हूं। तो चलिए शुरू करते हैं- मेरा कस्बा, सच कहूं तो मेरा जन्म तो कहीं ओर ही हुआ था पर मैं पली बढ़ी अपने कस्बे, अपने घर से हूं। मेरा कस्बा, जिसका नाम है "नौगांव (Nowgong)"। जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आता है। जो छतरपुर जिले की एक तहसील भी है। नौगांव, नाम से पूरा गांव लगता है, सब बोलते भी है कि तुम्हारा नौगांव तो एक गांव है, अरे गांव के हो तुम! तो एक छोटा सा सवाल मेरा भी अगर गांव है भी तो बुरा क्या है?? गांव बुरे होते है क्या?? पर पता है आपको, हमारे नौगांव जैसा गांव भी कोई नहीं होगा, अब बताते है क्यूं। तो जिसको तुम गांव बोल रहे हो, उसमे ऐसी ऐसी सुविधा है, जो हर जगह नहीं होती। अब हम आपको पहले अपने नौगांव का थोड़ा सा इतिहास बताते है। तो बात है सन् 1842 के समय की, नौगांव के पास यूपी के महोबा जिले का एक कस्बा है, बेलाताल (जैतपुर)। जहां के राजा हुआ करते थे पारीक्षित, जिनको हराने के लिए अंग्रेजों ने छावनी बसाई, जो आज नौगांव के नाम से जानी जाती है। नौगांव को एक समय पर मिनी चंडीगढ़ के नाम से भी ...