मेरा कस्बा

नमस्कार,
    मैं आज आपको अपने घर, अपने कस्बे के बारे में बताने वाली हूं। तो चलिए शुरू करते हैं-
मेरा कस्बा, सच कहूं तो मेरा जन्म तो कहीं ओर ही हुआ था पर मैं पली बढ़ी अपने कस्बे, अपने घर से हूं। मेरा कस्बा, जिसका नाम है "नौगांव (Nowgong)"। जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के अंतर्गत आता है। जो छतरपुर जिले की एक तहसील भी है। नौगांव, नाम से पूरा गांव लगता है, सब बोलते भी है कि तुम्हारा नौगांव तो एक गांव है, अरे गांव के हो तुम! तो एक छोटा सा सवाल मेरा भी अगर गांव है भी तो बुरा क्या है?? गांव बुरे होते है क्या?? पर पता है आपको, हमारे नौगांव जैसा गांव भी कोई नहीं होगा, अब बताते है क्यूं। तो जिसको तुम गांव बोल रहे हो, उसमे ऐसी ऐसी सुविधा है, जो हर जगह नहीं होती।
अब हम आपको पहले अपने नौगांव का थोड़ा सा इतिहास बताते है। तो बात है सन् 1842 के समय की, नौगांव के पास यूपी के महोबा जिले का एक कस्बा है, बेलाताल (जैतपुर)। जहां के राजा हुआ करते थे पारीक्षित, जिनको हराने के लिए अंग्रेजों ने छावनी बसाई, जो आज नौगांव के नाम से जानी जाती है। नौगांव को एक समय पर मिनी चंडीगढ़ के नाम से भी जाना जाता था। 15 अगस्त 1947 में विंध्य प्रदेश की राजधानी के रूप में इसे नवाजा गया। नौगांव में 36 बंगले, 36 हाउस का निर्माण कराया गया था जो बुंदेलखंड के 36 रियासतों के राजाओं के रुकने के लिए थे।  1842 से 1932 तक यहां ब्रिटिश कालीन कंजुमेंट हुआ करते थे, जिसके अंदर पॉलिटिकल एजेंडा बैठता था जो इन 36 रियासतों पर शासन करता था।
    आज हमारे नौगांव में बालिका हरिजन छात्रावास संचालित किया जाता है,। आज यहां सिविल अस्पताल, टी बी अस्पताल (जो पूरे भारत मे केवल 94 है।),  ITI कॉलेज, Polytechnic College, Govt Engineering college भी है। और बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज भी आने वाला है। शायद ही ऐसा कोई गांव होगा जहां इतनी सारी सुविधा एकसाथ उपलब्ध हो। 180 वर्ष पहले यह भारत की पहली स्मार्ट सिटी थी जिसकी परिकल्पना ब्रिटेन में की गई। जो आज सिर्फ एक तहसील में सिमट कर रह गई।

पर्यटन- 
- नौगांव में बाबा गुलाब शाह की दरगाह भी है जो हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक है। जहां हर एक धर्म के लोग आते है। 🙏

- नौगांव से 69 किमी की दूरी पर खजुराहो है, जो पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही उत्तम जगह है।

- 2:30 घंटे की दूरी पर महाकाल शिव को प्रसिद्ध धाम कुंडेश्वर भी है, जो टीकमगढ़ जिले में आता है।

- छतरपुर से लगभग 50 km दूर जटाशंकर धाम भी है, जहां श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने भारी मात्रा में जाते है।

- नौगांव से लगभग 12 किमी दूर धुबेला है, जहां मस्तानी बाई का महल, राजा छत्रसाल की पहली पत्नी कमलापति (देवकुंवरी) का महल, छत्रसाल महाराज के गुरू प्राणनाथ की समाधि, महाराजा छत्रसाल संग्रहालय आदि है।

- नौगांव से लगभग 100 कि मी की दूरी पर ओरछा भी स्थित है।

तो कुछ ऐसा है हमारा गांव।😊😊

स्रोत- इंटरनेट, Wikipedia

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