मांस खाने वाले लोगों की पूजा, भगवान स्वीकार करते है या नहीं?
नमस्कार 🙏,
बहुत समय के बाद आखिर मिलना हुआ, कैसे हैं आप सभी?? आज हम यहां इस विषय के बारे में चर्चा करने वाले है, यह जानने वाले है कि मांसाहारी लोगो की पूजा भगवान स्वीकार करते है या नहीं? तो चलिए शुभारंभ करते है..।
यह बात मैने सबसे पहले पूज्य प्रेमानंद जी के मुख से सुनी थी फिर मैने इस विषय को काफी खोजा तो हां, बहुत सी जगह पर यह प्रमाणित है, बहुत सी धार्मिक ग्रंथों ( स्कंद पुराण, भगवत गीता इत्यादि) में यह लिखा है कि मांसाहारी मनुष्यों की पूजा कोई भी देवी देवता नहीं स्वीकारते।
उस प्रभु के लिए सभी उसकी संतान है, चाहे वह मनुष्य हो या कोई जीव। और जब सभी उनकी संताने है तो कोई माता या पिता अपनी संतानों की हत्या करने वाले को कहां क्षमा करता है, तो प्रभु कैसे स्वीकार कर ले ऐसे मनुष्यों की पूजा जिन्होंने सिर्फ अपनी भूख शांत करने के लिए एक जीव की हत्या कर दी और उसका उन्हें कोई खेद भी नहीं।
स्कंद पुराण के अनुसार
काशी खंड तीसरे अध्याय
इस अध्याय में बताया गया है कि - "जो मनुष्य मांस का सेवन करता है उसके जीवन को धिक्कार है, ऐसे मनुष्य को ना तो मृत्यु लोक में सुख मिलता है और ना ही मृत्यु के बाद किसी दूसरे लोक में सुख मिलता है।"
इसके साथ ही स्कंद पुराण में एक प्रसंग का और वर्णन मिलता है जिसके अनुसार-
"जब एक बार सभी देवता गण काशी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक बाघ जैसे हिंसक पशु भी वहां घास खा रहे है।"
स्कंद पुराण में यह भी बताया गया है कि
"यदि भूख से किसी प्राणी की मृत्यु होने को हो तो भी उसे मांस नहीं खाना चाहिए।"
स्कंद पुराण के अनुसार -
"भगवान शिव उन लोगों की भक्ति यह पूजा कभी स्वीकार नहीं करते जो लोग मांस-मदिरा का सेवन करते हैं।"
वराह पुराण
वराह पुराण के अनुसार-
"भगवान विष्णु के वराह अवतार पृथ्वी देवी के पूछने पर कहते है कि जो मनुष्य मांस का भक्षण करते है मैं ना तो उसकी पूजा स्वीकार करता हूँ और ना ही उसको अपना भक्त मानता हूँ।"
और साथ ही वह अपने वराह अवतार में पृथ्वी देवी से कहते कि "जो मनुष्य मछली या दूसरे पशुओं के मांस का सेवन करता है मेरे लिए उससे बड़ा अपराधी और कोई भी नहीं।"
भगवत गीता
भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने यह भी बताया है कि मनुष्य को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।
भगवान कृष्ण के अनुसार "मांस एक तामसिक भोजन है जिसके सेवन से मनुष्य की बुद्धि क्षीण होने लगती है और मनुष्य अपनी इंद्रियों पर से नियंत्रण खो देता है, उसके बाद मनुष्य ना चाहते हुए भी कई तरह के अपराधों का भागी बन जाता है और ऐसा मनुष्य जब मेरी पूजा करता है या मुझे याद करता है तो मैं उसके पास नहीं जाता हूँ।"
भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं कि "मांसाहारी भोजन राक्षसों के लिए है न की इंसानों के लिए।"
भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आहार को तीन भागों में विभाजित किया गया है
राजसिक
तामसिक
सात्विक
जिसके अनुसार सात्विक भोजन लंबी आयु देने वाला,मन को शुद्ध करने वाला, बल बुद्धि प्राप्त और तृप्ति प्रदान करने वाला है।
हिंदू धर्म में मांस खाना सही है कि नहीं इसके बारे में कई लोगों को भ्रम है और इसका मुख्य कारण यह है कि लोगों को धर्म शास्त्र में वर्णित ज्ञान का ना होना।
वेदों के अनुसार
कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि वेद मांस भक्षण को जायज बताता है लेकिन यह सच नहीं है।
सच तो यह है कि वेदों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि पशु हत्या अर्थात पशु बलि पाप की श्रेणी में आता है।
वेदों का सार उपनिषद और उपनिषदों का सार भगवत गीता है जिसके अनुसार वेदों में मांस खाने की संबंध में स्पष्ट मना किया गया है।
वेदों में बताया गया है कि "जो मनुष्य नर, अश्व अथवा अन्य किसी पशु का मांस का सेवन कर उसको अपने शरीर का भाग बनाता है, गौ की हत्या कर अन्य जनों को दूध आदि से वंचित करता है उससे बड़ा पापी इस सृष्टि में कोई भी नहीं।"
ऋग्वेद के अनुसार
ऋग्वेद में भी बताया गया है कि "गाय जगत की माता है और उनकी रक्षा में ही समाज की उन्नति है मनुष्य को उनके समान सभी चार पैर वाले पशुओं की रक्षा करनी चाहिए।"
यजुर्वेद के अनुसार
"सभी मनुष्य को परमात्मा के सभी रचनाओं को अपनी आत्मा के समान तुल्य मानना चाहिए
अर्थात वे अपना जैसा हित चाहते हैं उसी तरह अन्य का भी हित करें।"
अथर्ववेद के अनुसार
अथर्ववेद में कहा गया कि "हे मनुष्य तुम चावल दाल गेहूं आदि खाद्य पदार्थ आहार के रूप में ग्रहण करो यही तुम्हारे लिए सबसे उत्तम और रमणीय खाद पदार्थों का भाग है।"
तुम किसी भी नर या मादा की कभी हिंसा मत करो।
वह लोग जो नर एवं मादा भ्रूण और अंडों के नाश से उपलब्ध हुए मांस को कच्चा या पका कर खाते हैं तुम्हें उनका विरोध करना चाहिए।
गरुड़ पुराण
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु पक्षीराज गरुड़ को एक कथा सुनाते हुए कहते हैं कि – "जो मनुष्य मांस का भक्षण करता है या फिर मदिरा का सेवन करता है उसकी भक्ति या फिर पूजा कोई भी देवता स्वीकार नहीं करते और ऐसे मनुष्य को ना ही कोई देवता मदद करते हैं इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह सात्विक भोजन करें ताकि उसके जीवन काल और मृत्यु के बाद भी ईश्वर का शरण मिल सके।"
भगवान विष्णु कहते हैं कि "जो मनुष्य स्वाद के लिए दूसरे पशुओं की हत्या करता है उसे मृत्यु के बाद पशुओं की उसी योनि में कई जन्मो तक भटकना पड़ता है और वह भी उसी तरह मारा जाता है जिस तरह खाने के लिए उसने पशु को मारा था।"
निष्कर्ष
इसलिए मित्रों अगर आप भगवान में और भगवान की भक्ति में विश्वास रखते है तो आप मांसाहारी भोजन का त्याग कर दें।
वैज्ञानिक रूप से भी इसे उचित भोज्य पदार्थ नहीं माना गया है, यह मनुष्यों को कई रोगों से ग्रसित कर देता है।
और जहां तक धार्मिक मान्यताओं की बात है उम्मीद करता हूं आप लोगों को समझ आ गई ही होगी।
तथा मांस भक्षण को लेकर महाभारत में भी बहुत से श्लोक कहे गए है, जो में अपनी अगली प्रस्तुति में दूंगी।
आपको आज का ब्लॉग कैसा लगा, नीचे कमेंट करके बताइए और आप शाकाहारी है या मांसाहारी, यह भी कमेंट करके बताइए ।
आपने अपना अमूल्य समय दिया उसके लिए हृदय से धन्यवाद🙏 और कुछ त्रुटी हुई हो तो क्षमाप्रार्थी 🙏।।
स्त्रोत -
hindico
Thoughtinhindi
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